63 Special Kalakand resipi कलाकंद को कैसे बनाएं –

63 Special Kalakand resipi कलाकंद को कैसे बनाएं –

आज आप स्वादिष्ट Kalakand resipi /कलाकंद को कैसे बनाएं 2023 सीखेगें आप लोग मीठे में अक्सर बहुत कुछ खाते हैं पर क्या आपने कलाकंद खाया है जो दुध से बनने वाली एक मिठाई है और बर्फी का बहुत ही मुलायम और स्वादिष्ट रूप है अगर नहीं तो आज आप जानेंगे स्वादिष्ट Kalakand resipi /कलाकंद को कैसे बनाएं https://ekaro.in/enkr20231001s36008859

कलाकंद राजस्थान के अलवर जिले का प्रसिद्ध हैं और अलवर में कलाकंद की प्रसिद्धी को आप इस प्रकार जान सकते हैं की वहां कलाकंद का एक अलग से बाजार है जिसे कलाकंद मार्केट कहते हैं और अकेले अलवर में ही कलाकंद की 200 से अधिक दुकानें हैं और जो पूरे भारत में सबसे अधिक लोकप्रिय मिठाइयों में से एक है ।

Kalakand resipi
Kalakand resipi

https://foodwada.com/
कलाकंद जितना खाने में स्वादिष्ट होता है कलाकंद बनाने की विधि भी उतनी ही आसन है जिसे आपने एक बार घर पर बनाना सीख लिया तो उसके बाद आपको कभी भी बाजार से कलाकंद लाने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी ।
वैसे तो कलाकंद परंपरागत रूप से बनाने पर बहुत ही कम सामग्री का उपयोग से बनता है यह सिर्फ दुध ,चीनी और इलाइची से बनाया जाता है और इस को कई नाम सफेद कलाकंद , मिस्री मावा और मिल्क केक के नामों से पुकारा जाता हैं जो खाने में बेहद स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है तो चलिए शुरू करते हैं कलाकंद को कैसे बनाएं जिसको बनाने में सिर्फ 20 से 30 मिनट लगेंगे

Kalakand resipi /कलाकंद को कैसे बनाएं और इसमें शामिल सामग्री :

  • 2 लीटर दुध
  • 250 से 300 ग्राम चीनी
  • 50 से 60 ग्राम घी
  • चुटकी भर नींबू का सत या 2 बूंदे नींबू के रस की

Kalakand resipi /कलाकंद को कैसे बनाएं और इसकी विधि:-

Kalakand बनाने की विधि
Kalakand बनाने की विधि

चलिए शुरू करते हैं कलाकंद को कैसे बनाएं सबसे पहले कलाकंद बनाने के लिए एक मोटे पेंदे वाली कड़ाई लीजिए और इसको थोड़ा गर्म करने के बाद इसमें थोड़ा सा घी लगा ले जिससे दुध कड़ाई के चिपकेगा नहीं अब इसमें दुध डालिए दुध क्रीम वाला ही होना चाहिए,

जिससे कलाकंद अच्छा और स्वादिष्ट बनता है अब दुध जब तक गर्म होकर एक या दो उबाल आए तब तक लगातार इसमें कड़छी या पलटे से मिलाते हुए उबाले जब अच्छे से उबलने लगे तो आप इसमें पलटा थोड़ी देर रुक रुक कर घुमा सकते हैं।

दुध को तब तक उबाले जब तक ये उबल कर आधा रहे जाए और दुध गाड़ा हो जाए ।


जब तक दुध गाड़ा होता है तब तक आप कलाकंद डालने के लिए एक स्टील का डिब्बा या कोई टिफिन लेकर इसमें घी लगा ले जिससे कलाकंद डिब्बे में अच्छे आकार में जम जाए और आसानी से बाहर निकल जाए।

https://ekaro.in/enkr20231001s36024485
जब दुध उबल कर आधा रह जाए यानी आपने दो किलोग्राम दुध लिया अब वो एक किलोग्राम रह जाए तो दुध के दाने बनाने के लिए इसमें चुटकी भर नींबू का सत या फिर इसमें नींबू के रस की 2 से 3 बूंदों को मिलाकर इसमें लगातार पलटे को चलाते चलाते उबाल लें और ध्यान रहे कि हमे दुध को फाड़ना नहीं है बल्कि हल्का दाने से बनाने है अब 2 से 3 मिनट तक पकाएं ।

अब उबलते हुए दुध में 250 से 300 ग्राम चीनी लेकर इसमें 2 – 2 मिनट रुक रुक कर थोड़ी थोड़ी चीनी डालिए और लगातार पलटे से मिलाते रहे और उबलते हुए दुध में ही चीनी मिलानी है इसमें उबाल आने जरूरी है नहीं तो ये कठोर हो जाएंगा।

जब सारी चीनी इसमें मिला ले जब ये मिल जाए अब आप इसमें घी डाले 50 से 60 ग्राम घी लेकर रूक रूक एक एक चम्मच घी धीरे धीरे इसमें मिलाते हुए और पलटे को इसमें लगातार चलाते रहे जब आप सभी सामग्री इसमें मिला ली है और जब दुध गाड़ा हो गया और इसमें जाले आने लगे तो समझो ये अच्छे से पक गया है और अब आप इसे घी लगे डिब्बे में डाल ले और कुछ घंटे ठंडा होने दें स्वादिष्ट कलाकंद तैयार है बिलकुल अलवर के कलाकंद जैसा मुलायम और स्वादिष्ट।

Kalakand resipi /कलाकंद को कैसे बनाएं और कलाकंद खाने के फायदे और नुकसान:

कलाकंद एक मिठाई है और कुछ लोगों का मानना है कि मिठाई सेहत के लिए नुकसान दायक होती हैं परंतु किसी भी प्रकार का भोजन तब नुकसान करता है जब इसे अधिक मात्रा में खाया जाए और वो भी बाजार के रसायनी पदार्थों से बनी अगर आप इसे घर पर ही बना कर खाए,

तो ये हमारे शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती हैं बल्कि यह स्वस्थ शरीर के संतुलन बनाए रखने फायदेमंद होती हैं ।हमारे मीठे खाने की चाह को नजर अंदाज करना हमारी सेहत के लिए उतना ही बुरा होता है जितना की मीठा अधिक मात्रा खाना होता है इसलिए समय समय पर मीठा खाना भी जरूरी होता है तो इसके लिए समय समय पर मीठा खाते रहना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »

Discover more from FOODWADA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading